शारदीय नवरात्रि: शक्ति साधना और माँ दुर्गा की उपासना का महापर्व

शारदीय नवरात्रि सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र उत्सव है, जो अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।

माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूप

नवरात्रि के नौ दिनों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुशमांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। प्रत्येक देवी माँ का स्वरूप भक्ति, शक्ति, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला है।

घटस्थापना एवं पूजा का विशेष महत्व

  • नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। कन्या पूजन और महानवमी अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं। नवरात्रि व्रत और भक्ति महिमा इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।

  • div3image
    प्रसिद्ध देवी शक्तिपीठ एवं दुर्गा मंदिर
    नवरात्रि व्रत और भक्ति महिमा
  • इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।

  • View3

    प्रसिद्ध देवी शक्तिपीठ एवं दुर्गा मंदिर

    माँ दुर्गा के सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन एवं इतिहास

    Kalighat Shakti Peeth

    Kolkata, West Bengal

    Ambaji Shakti Peeth

    Banaskantha, Gujarat

    Shri Durga Mata Mandir

    Kanpur Nagar, Uttar Pradesh

    Meenakshi Amman Temple

    Madurai, Tamil Nadu

    Akshardham Temple

    East Delhi, Delhi

    Vaishno Devi Temple

    Reasi, Jammu and Kashmir

    Online Live Pooja Facility Also Available
    In Somnath

    अनुभवी एवं विद्वान पंडित जी से ऑनलाइन पूजा बुक करें

    घर पर घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं हवन हेतु आचार्य

    कन्या पूजन और महानवमी

    अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।

    Div4 View
    <b>कन्या पूजन और महानवमी</b>
    घटस्थापना एवं पूजा का विशेष महत्व

    घटस्थापना एवं पूजा का विशेष महत्व

    नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।

    DIv5 View

    शारदीय नवरात्रि विशेष ब्लॉग एवं आध्यात्मिक लेख

    नवरात्रि पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त और व्रत नियम

    नवरात्रि महापूजा एवं गरबा-डांडिया उत्सव

    शारदीय नवरात्रि नवदुर्गा पूजन एवं महायज्ञ अनुष्ठान