Kalighat Shakti Peeth
Kolkata, West Bengal
शारदीय नवरात्रि सनातन धर्म का एक अत्यंत पवित्र उत्सव है, जो अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाया जाता है। इन नौ दिनों में माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व अधर्म पर धर्म और बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
माँ दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूप
नवरात्रि के नौ दिनों में शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुशमांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की उपासना की जाती है। प्रत्येक देवी माँ का स्वरूप भक्ति, शक्ति, शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला है।
नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है। कन्या पूजन और महानवमी अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं। नवरात्रि व्रत और भक्ति महिमा इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।
इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।इन नौ दिनों में भक्त उपवास रखकर और दुर्गा सप्तशती का पाठ करके माँ की कृपा प्राप्त करते हैं। डांडिया और गरबा उत्सव इस पर्व के उल्लास को और बढ़ा देते हैं।
माँ दुर्गा के सिद्ध शक्तिपीठों के दर्शन एवं इतिहास
घर पर घटस्थापना, दुर्गा सप्तशती पाठ एवं हवन हेतु आचार्य
अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।अष्टमी और नवमी तिथि को कन्या पूजन (कंचक) का विशेष विधान है। नौ छोटी कन्याओं को माँ दुर्गा का रूप मानकर उनका पूजन, आदर-सत्कार और भोजन कराया जाता है, जिससे माँ प्रसन्न होकर मनोवांछित फल देती हैं।
नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) की जाती है। अखंड ज्योति जलाकर देवी माँ का आह्वान किया जाता है, जिससे घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-समृद्धि और शांति का वास होता है।
नवरात्रि पूजा विधि, घटस्थापना मुहूर्त और व्रत नियम
शारदीय नवरात्रि नवदुर्गा पूजन एवं महायज्ञ अनुष्ठान
भारत के प्रमुख मंदिर विभिन्न राज्यों में फैले हुए हैंं।
कन्या पूजन महाअष्टमी या महानवमी तिथि को किया जाता है।
शारदीय नवरात्रि अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तिथि तक मनाया जाने वाला सनातन धर्म का अत्यंत पवित्र पर्व है। शरद ऋतु की शुरुआत में आने के कारण इसे शारदीय नवरात्रि कहा जाता है।
नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना की जाती है, जिसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा और समस्त देवी-देवताओं का प्रतीक माना जाता है।
नवरात्रि के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ दिव्य स्वरूपों (नवदुर्गा) की पूजा होती है:
माँ शैलपुत्री
माँ ब्रह्मचारिणी
माँ चंद्रघंटा
माँ कुष्मांडा
माँ स्कंदमाता
माँ कात्यायनी
माँ कालरात्रि
माँ महागौरी
माँ सिद्धिदात्री
नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का विधि-विधान से पाठ करने से साधक को भय, संकट, रोग और शत्रुओं से मुक्ति मिलती है।