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Vijethua Temple (Vijethua Dham) share

Sultanpur, Uttar Pradesh

 Vijethua Temple के बारे में

  • स्थान: यह मंदिर सुल्तानपुर जिले के सूरापुर बाजार से दक्षिण दिशा में स्थित है।

  • मुख्य देवता: यहाँ भगवान हनुमानजी की प्राचीन प्रतिमा स्थापित है, जिन्हें स्थानीय लोग 'बिजेथुआ महावीरन' के रूप में पूजते हैं।

  • विशेषता: मंदिर परिसर में एक प्राचीन 'मकड़ी कुंड' (सरोवर) स्थित है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसके जल के स्पर्श या स्नान से भक्तों के कष्ट दूर होते हैं। यहाँ मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु घंटियाँ अर्पित करते हैं। हर मंगलवार और शनिवार को यहाँ भारी मेला लगता है।

  • मंदिर का इतिहास

  • प्रतिमा का रहस्य: मंदिर के गर्भगृह में हनुमान जी की जो प्रतिमा स्थापित है, उसका एक पैर जमीन के भीतर काफी गहराई तक गया हुआ है। किंवदंतियों और स्थानीय चर्चाओं के अनुसार, एक बार इस बात का पता लगाने के लिए कि प्रतिमा का छोर कहाँ तक है, इसकी खुदाई कराई गई थी, लेकिन काफी नीचे तक खुदाई होने के बावजूद इसके पैर के अंत का पता नहीं चल सका, जिसके बाद खुदाई बंद कर दी गई।

  • ऐतिहासिक साक्ष्य: मंदिर परिसर में आज भी वर्ष 1889 की उत्कीर्णित (चीना) घंटियाँ और पुरानी संरचनाएँ मौजूद हैं, जो इसके लंबे ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की गवाही देती हैं।

  • कहानी

    विजेथुआ धाम का सीधा संबंध रामायण (त्रेतायुग) काल से है:

    • जब रावण के साथ युद्ध के दौरान मेघनाद के बाण से लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए थे, तब वैद्य सुषेण के बताए अनुसार हनुमान जी द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाने के लिए आकाश मार्ग से जा रहे थे।

    • रावण ने हनुमान जी की यात्रा में बाधा डालने और उन्हें समय पर पहुँचने से रोकने के लिए कालनेमि नामक मायावी राक्षस को भेजा।

    • कालनेमि ने रास्ते में एक सुंदर आश्रम बनाया और साधु का वेश धारण करके बैठ गया। उसने छलपूर्वक हनुमान जी को अपने पास बुलाया और जल पीने तथा विश्राम करने का आग्रह किया।

    • जब हनुमान जी उस कुंड (वर्तमान मकड़ी कुंड) पर जल पीने पहुँचे, तो एक अप्सरा (जो श्राप के कारण मकड़ी बनी हुई थी) ने हनुमान जी को कालनेमि के छल और उसकी असलियत के बारे में बताया।

    • सच्चाई जानने के बाद हनुमान जी ने तुरंत उसी स्थान पर कालनेमि राक्षस का वध कर दिया। इसके बाद हनुमान जी ने कुंड में स्नान किया और संजीवनी की खोज के लिए आगे प्रस्थान किया।

    अक्सर पूछे जाने वाले सवाल